निर्वाचक नामावलियों का विशेष गहन पुनरीक्षण
मुख्य लेखप्रारंभिक और मुख्यJune 2026
चर्चा में क्यों
निर्वाचन आयोग का निर्वाचक नामावलियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जून 2026 में अपने तीसरे चरण में था, जिसमें 16 राज्य, तीन संघ राज्य क्षेत्र और लगभग 36.7 करोड़ निर्वाचक शामिल थे। उच्चतम न्यायालय ने 27 मई 2026 को शर्तों के साथ इस प्रक्रिया को वैध ठहराया था।
पृष्ठभूमि
- निर्वाचक नामावली किसी निर्वाचन क्षेत्र में मत देने के हकदार व्यक्तियों की सूची है। इसे सामान्यतः हर वर्ष संक्षिप्त पुनरीक्षण (summary revision) से अद्यतन किया जाता है, जो मौजूदा सूची में नाम जोड़ता और हटाता है।
- गहन पुनरीक्षण में बूथ स्तर अधिकारी (Booth Level Officer) घर घर जाकर गणना करते हैं और नामावली नए सिरे से तैयार होती है।
- यह शक्ति अनुच्छेद 324 से आती है, जो चुनावों का अधीक्षण निर्वाचन आयोग में निहित करता है, और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) से।
- अनुच्छेद 326 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के हर उस नागरिक को मताधिकार देता है जो अन्यथा अयोग्य नहीं है।
- यह प्रक्रिया 2025 में बिहार से शुरू हुई, फिर राज्यों के दूसरे समूह तक गई, और मई 2026 में अपने तीसरे चरण में पहुँची।
उच्चतम न्यायालय ने क्या कहा
- आयोग यह जाँच सकता है कि कोई व्यक्ति पात्र है या नहीं कि उसका नाम नामावली में रहे।
- वह नागरिकता तय नहीं करता; यह नागरिकता अधिनियम, 1955 के अधीन होता है।
- आधार और मतदाता पहचान पत्र पहचान सिद्ध करते हैं, नागरिकता नहीं।
- किसी नाम को हटाने से पहले सूचना, सुनवाई और अपील का अधिकार हो, तभी यह प्रक्रिया वैध है।
इस पर विवाद क्यों है
- नाम हटाने का पैमाना: खबरों के अनुसार जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर गृह मंत्रालय की एक समिति पिछले चरणों में हटाए गए लगभग 6.5 करोड़ नामों का अध्ययन कर सकती है।
- मतदाता पर भार: जिस व्यक्ति से पात्रता सिद्ध करने को कहा जाता है, उसे ऐसे दस्तावेज़ देने पड़ते हैं जो गरीबों, प्रवासियों और विवाह के बाद स्थान बदलने वाली महिलाओं के पास अक्सर नहीं होते।
- पिछले दरवाज़े से नागरिकता की जाँच: आलोचकों का कहना है कि पात्रता की जाँच व्यवहार में एक ऐसे प्राधिकारी द्वारा नागरिकता की परीक्षा बन जाती है जिसे यह तय करना ही नहीं है।
- इसके पक्ष में तर्क: नामावलियों में मृत, स्थान बदल चुके और दोहरे नाम रहते हैं, और स्वच्छ नामावली स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की शर्त है।
आधार और नामावली
- जून 2026 में सुनी गई एक याचिका में कहा गया कि आधार का दुरुपयोग नागरिकता और निवास के प्रमाण के रूप में हो रहा है।
- आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 कहती है कि आधार संख्या नागरिकता या अधिवास का प्रमाण नहीं है।
उद्धृत करने योग्य मामले
- Association for Democratic Reforms v. Election Commission of India (2026): शर्तों के साथ पुनरीक्षण को वैध ठहराया, यानी सूचना, सुनवाई और अपील के साथ।
- Lal Babu Hussein v. Electoral Registration Officer (1995): जिस व्यक्ति का नाम पहले से नामावली में है, उससे उसके विरुद्ध किसी सामग्री के बिना नए सिरे से नागरिकता सिद्ध करने को नहीं कहा जा सकता।
- Mohinder Singh Gill v. Chief Election Commissioner (1978): अनुच्छेद 324 शक्ति का भंडार है, पर यह वहीं लागू होता है जहाँ कानून मौन है, और इसका प्रयोग निष्पक्ष ढंग से होना चाहिए।
आगे की राह
- श्रेणीवार हर नाम हटाने के कारण प्रकाशित किए जाएँ, ताकि प्रक्रिया का अंकेक्षण हो सके।
- दस्तावेज़ों की विस्तृत सूची स्वीकार की जाए, और सत्यापन का दायित्व मतदाता पर नहीं, राज्य पर हो।
- पुनरीक्षित नामावली पर चुनाव होने से पहले अपीलों का निपटारा हो।
- जैसा न्यायालय ने कहा है, नामावली को कल्याण और नागरिकता के अभिलेखों से अलग रखा जाए।
प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य
- निर्वाचक नामावलियाँ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अधीन तैयार होती हैं; चुनावों का संचालन 1951 के अधिनियम के अधीन होता है।
- अनुच्छेद 324: चुनावों का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण। अनुच्छेद 326: वयस्क मताधिकार।
- फ़ॉर्म 6 नाम शामिल करने का आवेदन है।
- आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है (धारा 9, आधार अधिनियम)।
स्रोत: The Hindu, 27 May 2026: Supreme Court upholds SIR exercise as an advancement towards free and fair elections (opens in a new tab) · The Hindu, 2 Jun 2026: Demography panel may study SIR exclusions; seeks details from government (opens in a new tab) · The Hindu, 16 Jun 2026: Supreme Court seeks Centre, States' response on plea over 'misuse' of Aadhaar (opens in a new tab) · The Hindu, 30 Jun 2026: Delhi SIR begins today (opens in a new tab) · Election Commission of India, 16 Jun 2026: Press Note No. 86 of 2026 (opens in a new tab)
पहले की कवरेज: निर्वाचक नामावलियों का विशेष गहन पुनरीक्षण · मासिक पत्रिका, June 2026
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