संसद ने कैसे काम किया: 2026 का मानसून सत्र
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चर्चा में क्यों
मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को समाप्त हुआ। विनियोग विधेयक को मिलाकर संसद ने 19 बैठकों में 12 विधेयक पारित किए। परंतु PRS Legislative Research की गणना के अनुसार लोक सभा ने अपने निर्धारित समय का केवल 15 प्रतिशत काम किया।
पृष्ठभूमि
- अनुच्छेद 85: राष्ट्रपति प्रत्येक सदन को आहूत करते हैं, और दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं हो सकता। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं।
- परिपाटी के अनुसार वर्ष में तीन सत्र होते हैं: बजट, मानसून और शीतकालीन।
- संसद के तीन काम हैं: कानून बनाना, धन पर नियंत्रण रखना, और कार्यपालिका को जवाबदेह ठहराना। किसी सत्र को इन तीनों पर परखा जाता है।
बहस के बिना कानून निर्माण
- नौ विधेयक लोक सभा में मंत्री के अतिरिक्त किसी वक्ता के बिना पारित हुए।
- उच्चतम न्यायालय की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक बिना बहस के पारित हुआ। अधिकरण सुधार विधेयक भी, जो उसी दिन पेश और पारित हुआ।
- एक विधेयक ने दिखाया कि बहस कैसी हो सकती है: जो विधेयक सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन अधिनियम बना, उस पर लगभग 11 घंटे तक 48 सदस्यों ने चर्चा की।
- वर्तमान लोक सभा में केवल लगभग पाँच में से एक विधेयक समिति को भेजा गया है।
जो निगरानी नहीं हुई
- पूरे सत्र में लोक सभा में प्रश्नकाल केवल नौ मिनट चला।
- उपाध्यक्ष का पद सात वर्ष से अधिक समय से रिक्त है। अनुच्छेद 93 कहता है कि सदन "यथाशीघ्र" एक उपाध्यक्ष चुनेगा, परंतु कोई समय सीमा तय नहीं करता।
धन पर नियंत्रण
- संसद ने 2022-23 में उसके द्वारा स्वीकृत राशि से अधिक खर्च किए गए धन के लिए अधिक अनुदान (excess grants) स्वीकृत किए।
- अनुच्छेद 115 के अंतर्गत अधिक अनुदान पर मतदान लोक लेखा समिति द्वारा उसकी जाँच के बाद ही होता है, जो तीन वर्ष के अंतर को समझाता है।
- अधिक अनुदान
- वर्ष समाप्त होने के बाद पारित अनुदान, ताकि संसद द्वारा स्वीकृत राशि से अधिक खर्च को नियमित किया जा सके।
व्यवधान क्यों बना रहता है
- जब बहस की उसकी माँगें ठुकरा दी जाती हैं तो विपक्ष व्यवधान को अपना एकमात्र साधन मानता है।
- सरकार कार्यसूची तय करती है और उसके पास समय देने का कम ही कारण होता है।
- दलबदल विरोधी कानून सदस्यों को मनाने की आवश्यकता समाप्त कर देता है, क्योंकि मत व्हिप तय करता है।
- कम बैठकें: पहली लोक सभा वर्ष में लगभग 135 दिन बैठी; हाल की लोक सभाएँ इससे कहीं कम बैठती हैं।
उद्धृत करने योग्य मामले
- Raja Ram Pal v. Speaker, Lok Sabha (2007): न्यायालय प्रक्रिया की अनियमितता के आधार पर कार्यवाही पर प्रश्न नहीं उठा सकते, परंतु अवैधता या असंवैधानिकता के आधार पर उठा सकते हैं (अनुच्छेद 122)।
- Rojer Mathew v. South Indian Bank (2019): यह प्रश्न कि धन विधेयक के रूप में क्या पारित किया जा सकता है, एक बड़ी पीठ को भेजा।
- Kalpana Mehta v. Union of India (2018): संसदीय समितियों की रिपोर्टों पर विशेषाधिकार भंग किए बिना न्यायालय में भरोसा किया जा सकता है।
आगे की राह
- कानून या नियम द्वारा तय बैठक के दिनों की न्यूनतम संख्या; संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग ने लोक सभा के लिए 120 दिन सुझाए थे।
- यूनाइटेड किंगडम की तरह विपक्ष के दिन, जिन दिन कार्यसूची विपक्ष तय करे।
- हर विधेयक समिति को भेजा जाए, जब तक कि सदन मतदान से अन्यथा तय न करे।
- नए सदन की बैठक के एक नियत समय के भीतर उपाध्यक्ष का चुनाव हो।
प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य
- अनुच्छेद 85: दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक नहीं।
- अनुच्छेद 93: लोक सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष। उपाध्यक्ष प्रायः विपक्ष से रहे हैं।
- अनुच्छेद 115: अनुपूरक, अतिरिक्त और अधिक अनुदान।
- संयुक्त समिति में दोनों सदनों के सदस्य होते हैं; FCRA विधेयक पर समिति में 31 सदस्य हैं।
- स्थगन पीठासीन अधिकारी करते हैं; सत्रावसान राष्ट्रपति।
स्रोत: The Hindu, 13 Aug 2026: Rajya Sabha Chairperson regrets disruptions during Monsoon Session; House productivity only 39% (opens in a new tab) · PRS Legislative Research, 13 Aug 2026: Functioning of Parliament during Monsoon Session 2026 (opens in a new tab) · News On AIR, 13 Aug 2026: Both Houses of Parliament adjourned sine die with passage of 12 Bills during Monsoon Session (opens in a new tab) · LiveLaw, 13 Aug 2026: Monsoon Session 2026: 12 Bills passed (opens in a new tab) · PRS Legislative Research, 31 Aug 2026: Monthly Policy Review, August 2026 (opens in a new tab)
पहले की कवरेज: संसद का कामकाज · मासिक पत्रिका, August 2026
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