दूरसंचार अधिनियम, 2023 और स्पेक्ट्रम आवंटन का तरीका
प्रारंभिक और मुख्यइस पर समसामयिकी: दूरसंचार नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और इंटरनेट अवसंरचना
स्पेक्ट्रम रेडियो आवृत्तियों का परिसर है, एक सार्वजनिक संसाधन जिसे सरकार मोबाइल ऑपरेटरों, प्रसारकों, उपग्रह सेवाओं, रक्षा और रेलवे को आवंटित करती है। उच्चतम न्यायालय के 2012 के 2G निर्णय के बाद, जिसने 122 लाइसेंस रद्द किए और कहा कि दुर्लभ प्राकृतिक संसाधन का आवंटन निष्पक्ष होना चाहिए, मोबाइल स्पेक्ट्रम नीलामी से बेचा जाता है। दूरसंचार अधिनियम, 2023 ने 1885 के भारतीय तार अधिनियम और 1933 के बेतार तार अधिनियम का स्थान लिया। यह नीलामी को नियम बनाए रखता है पर अपनी पहली अनुसूची में वे उपयोग गिनाता है जिनके लिए केंद्र बिना नीलामी के प्रशासनिक रूप से स्पेक्ट्रम आवंटित कर सकता है, जिनमें उपग्रह संचार भी है, और इसी से उपग्रह इंटरनेट ऑपरेटरों को बोली लगाए बिना लाइसेंस मिल सका। यह लाइसेंस के स्थान पर प्राधिकार लाता है, केंद्र को नेटवर्क अपने अधीन लेने और संदेश अवरोधित करने की शक्तियाँ देता है, केबल और टावर के लिए मार्ग अधिकार व्यवस्था बनाता है, और सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष का नाम बदलकर डिजिटल भारत निधि करता है।
नीलामी बनाम प्रशासनिक आवंटन
| नीलामी | प्रशासनिक आवंटन | |
|---|---|---|
| Used for | terrestrial mobile spectrum | First Schedule uses: satellite services, defence, railways, public broadcasting, disaster, research and others |
| Who decides | DoT, on TRAI's reserve price advice | the Centre by rule, at an administratively set price |
| Why | the 2G judgment: scarce resource, fair allocation, revenue | shared or non exclusive use where exclusivity makes no sense |
| Effect on the operator | exclusive rights for 20 years; heavy upfront cost | a fee and conditions; no exclusivity |
| The 2023 debate | terrestrial operators wanted satellite spectrum auctioned | satellite operators won administrative assignment |
- संस्थाएँ: दूरसंचार विभाग (DoT) स्पेक्ट्रम आवंटित करता है और प्राधिकार देता है; भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI), 1997 के TRAI अधिनियम के अंतर्गत, मूल्य निर्धारण और नीति पर संस्तुति देता है तथा शुल्क और गुणवत्ता का विनियमन करता है; दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय अधिकरण अपीलें सुनता है।
- नीलामी क्यों: वे दुर्लभ संसाधन का मूल्य तय करती हैं और स्वविवेक हटाती हैं, पर ऑपरेटरों पर ऋण लाद देती हैं, जो 2019 के समायोजित सकल राजस्व संकट और अधिकांश निजी ऑपरेटरों के बाहर हो जाने का एक कारण है, जिससे केवल तीन बचे।
- उपग्रहों के लिए प्रशासनिक आवंटन क्यों: उपग्रह की किरण पूरे देश को ढकती है और ऑपरेटरों के बीच साझा होती है, इसलिए विशेष अधिकार वाले नीलाम किए गए खंडों का कोई अर्थ नहीं; इस पर लड़ने वाले वही स्थलीय ऑपरेटर थे जिन्हें सस्ती प्रतिस्पर्धा का डर था।
- बैंड और पीढ़ियाँ: कवरेज के लिए 700 MHz बैंड, मुख्य 5G बैंड के रूप में 3.3 से 3.6 GHz, क्षमता के लिए 26 GHz मिलीमीटर तरंग; भारत में 5G 2022 से शुरू हुआ, और 6G अनुसंधान अगला घोषित लक्ष्य है।
- अधिनियम की आलोचना: स्वतंत्र निगरानी के बिना अवरोधन और बंदी की शक्तियाँ, दूरसंचार की परिभाषा का विस्तार, जो इंटरनेट अनुप्रयोगों तक पहुँच सकता है, और डिजिटल भारत निधि का ग्रामीण संपर्क से परे उद्देश्यों के लिए उपयोग।
मुख्य परीक्षा: 2023 का अधिनियम एक दशक पुराने प्रश्न, नीलामी या आवंटन, का उत्तर “यह उपयोग पर निर्भर है” कहकर देता है, और उपग्रह अपवाद सिद्धांत दिखाता है: नीलामी को उचित ठहराने वाली बात दुर्लभता नहीं, विशेषाधिकार है।
अतिरिक्त पठन: The Telecommunications Bill, 2023 (PRS India)
यह भी देखें: Satellite internet: the ground segment, the licence and the spectrum · केबल लैंडिंग स्टेशन · फोटोनिक्स
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