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English — अंग्रेज़ी में पढ़ेंजैव अर्थव्यवस्था, जैव विनिर्माण और जैव सुरक्षा
जैव अर्थव्यवस्था और उसके रक्षोपाय: जैव विनिर्माण और संश्लेषित जीव विज्ञान, उन्हें धन देने वाली नीतियाँ और निकाय, जैव सुरक्षा प्रयोगशालाएँ, और दोहरे उपयोग वाले अनुसंधान पर बने नियम। यह GS3 के उत्तरों में जैव प्रौद्योगिकी के लिए उपयोगी है।
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भारत की जैव अर्थव्यवस्था
Copy link to भारत की जैव अर्थव्यवस्थाप्रारंभिक और मुख्य
जैव अर्थव्यवस्था अर्थव्यवस्था का वह भाग है जो जैविक संसाधनों और जैव प्रौद्योगिकी पर खड़ा है, टीकों और जैव ईंधनों से लेकर औद्योगिक एंज़ाइमों तक।
- विश्व का सबसे बड़ा टीका उत्पादक होने का भारत का दावा मूल्य के बजाय मात्रा पर टिका है।
क्या बदला
17 Jul 2026
- नीति आयोग (NITI Aayog) के एक रोडमैप में 2026 से 35 के लिए 50,000 करोड़ रुपये के जैव अर्थव्यवस्था वृद्धि कोष का प्रस्ताव है, ताकि जैव अर्थव्यवस्था 2035 तक लगभग 69,100 करोड़ डॉलर तक पहुँच जाए।
- इसमें छह राष्ट्रीय मिशनों का भी प्रस्ताव है, जिनमें जीन तथा कोशिका चिकित्सा के लिए GeneIndia और जीन एडिटेड फसलों के लिए AgriBio 2.0 शामिल हैं।
- 2024 की BioE3 नीति के अंतर्गत बायोफाउंड्री और जैव विनिर्माण सुविधाओं को धन दिया गया है, और एक स्ट्रेन संसाधन केंद्र स्वदेशी उत्पादन सूक्ष्मजीव उपलब्ध कराता है।
The Hindu, 17 Jul 2026: NITI Aayog suggests ₹50,000-crore fund for biotech growth (opens in a new tab) · PIB, 16 Jul 2026: Government Focuses on Building Sovereign Biotechnology Ecosystem Through Talent, Innovation and Industry Partnerships: Dr Jitendra Singh (opens in a new tab) · PIB, 23 Jul 2026: PARLIAMENT QUESTION: IMPLEMENTATION OF BIOE3 POLICY (opens in a new tab)