राजव्यवस्था और शासन › संघवाद
English — अंग्रेज़ी में पढ़ेंअंतरराज्यीय संबंध, परिषदें, सीमा और जल विवाद
राज्य आपस में: वे परिषदें जहाँ वे मिलते हैं, उनके सीमा और जल विवाद, और अनुच्छेद 3 और 4 के अधीन राज्यों का पुनर्गठन।
असम और नागालैंड का तेल अन्वेषण समझौता
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असम और नागालैंड का तेल अन्वेषण समझौता दोनों राज्यों की सीमा के विवादित क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन के संयुक्त अन्वेषण के लिए केंद्र के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता है।
क्या बदला
11 Jun 2026संक्षिप्तनया जोड़ा गयायह विवादित क्षेत्र के 1,000 वर्ग किमी से अधिक को शामिल करता है, और उत्पादन 50:50 के अनुपात में बँटेगा। सीमा का प्रश्न स्वयं अनुच्छेद 131, यानी राज्यों के बीच विवादों में उच्चतम न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार, के अंतर्गत असम के 1988 के वाद में न्यायालय के समक्ष बना हुआ है। मुख्य परीक्षा: क्षेत्रीय विवाद के न्यायालय में रहते हुए राजस्व बाँटना सीमा तय किए बिना सहयोग करने का एक तरीका है। Swarajya, 11 Jun 2026: Northeast oil exploration gets major push as Assam, Nagaland and Centre ink tripartite pact in New Delhi (opens in a new tab)
केरल बना केरलम
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मुख्य लेखकेरल बना केरलम: किसी राज्य का नाम कैसे बदला जाता हैAugust 2026
चर्चा में क्यों
25 अगस्त 2026 से केरल राज्य आधिकारिक रूप से केरलम है। संसद ने अनुच्छेद 3 के अंतर्गत केरल (नाम परिवर्तन) अधिनियम, 2026 पारित किया, और राष्ट्रपति ने 14 अगस्त को उसे स्वीकृति दी।
पृष्ठभूमि
- मलयालम में इस राज्य को केरलम कहा जाता है। केरल विधानसभा ने इस परिवर्तन की माँग करते हुए 2023 में और फिर जून 2024 में संकल्प पारित किए।
- संविधान की पहली अनुसूची राज्यों को नाम से सूचीबद्ध करती है, इसलिए नाम केवल संसद बदल सकती है।
- अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्य बनाने और किसी भी राज्य के क्षेत्र, सीमाओं या नाम में परिवर्तन करने देता है।
अनुच्छेद 3 और 4 के अंतर्गत प्रक्रिया
- विधेयक केवल राष्ट्रपति की सिफ़ारिश पर ही पेश किया जा सकता है।
- राष्ट्रपति को पहले, एक नियत समय के भीतर विचार जानने के लिए, विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल को भेजना होता है।
- राज्य के विचार संसद को बाध्य नहीं करते।
- विधेयक किसी सामान्य कानून की तरह साधारण बहुमत से पारित होता है।
- अनुच्छेद 4 कहता है कि ऐसा कानून अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान का संशोधन नहीं है, भले ही वह पहली और चौथी अनुसूची को बदलता हो।
अधिनियम क्या करता है
- यह पहली अनुसूची (राज्य) और चौथी अनुसूची (राज्य सभा में सीटें) में, तथा अनुच्छेद 31A और 290A में, "केरल" के स्थान पर "केरलम" करता है।
- यह सरकार को मौजूदा कानूनों को अनुकूलित करने के लिए एक वर्ष देता है।
यह भारतीय संघवाद के बारे में क्या बताता है
- भारत "विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ" है: संसद किसी राज्य की सहमति के बिना उसकी सीमाएँ फिर से खींच सकती है या उसका नाम बदल सकती है।
- यह संयुक्त राज्य अमेरिका से भिन्न है, जहाँ किसी राज्य का क्षेत्र उसकी सहमति के बिना नहीं बदला जा सकता।
- व्यवहार में संघ ने नामों पर केवल तभी कदम उठाया जब राज्य ने माँगा। यहाँ अनुरोध विधानसभा से दो बार आया।
- उलटा उदाहरण संघ की पकड़ दिखाता है: पश्चिम बंगाल का अनुरोध कि उसका नाम बांग्ला हो, वर्षों से लंबित है।
- इसी अनुच्छेद 3 का प्रयोग 2019 में जम्मू और कश्मीर को पुनर्गठित करके दो संघ राज्य क्षेत्र बनाने में हुआ।
उद्धृत करने योग्य मामले
- Babulal Parate v. State of Bombay (1960): संसद राज्य विधानमंडल के विचारों से बाध्य नहीं है; संशोधित होने पर विधेयक को फिर से भेजना आवश्यक नहीं।
- In re Berubari Union (1960): अनुच्छेद 3 भारतीय क्षेत्र किसी विदेशी राज्य को सौंपने पर लागू नहीं होता; उसके लिए संविधान संशोधन चाहिए।
- In re Article 370 of the Constitution (2023): लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र के गठन को सही ठहराया; यह प्रश्न खुला छोड़ा कि क्या किसी राज्य को पूरी तरह संघ राज्य क्षेत्र में बदला जा सकता है।
आगे की राह
- यह परिपाटी बनाए रखी जाए कि नाम केवल राज्य के अनुरोध पर बदले।
- ऐसे अनुरोधों पर एक नियत समय के भीतर निर्णय हो, ताकि कोई लंबित अनुरोध टकराव का कारण न बने।
प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य
- किसी राज्य का नाम संसद अनुच्छेद 3 के अंतर्गत साधारण बहुमत से बदलती है।
- राष्ट्रपति की पूर्व सिफ़ारिश और राज्य विधानमंडल को संदर्भ आवश्यक हैं; राज्य के विचार बाध्यकारी नहीं हैं।
- अनुच्छेद 4 के अंतर्गत ऐसा कानून संविधान संशोधन नहीं है।
- पहले के परिवर्तन: मद्रास से तमिलनाडु (1969), मैसूर से कर्नाटक (1973), उत्तरांचल से उत्तराखंड (2007), उड़ीसा से ओडिशा (2011)।
- किसी शहर का नाम बदलने के लिए संसद के कानून की आवश्यकता नहीं होती।
मलयालम में इस राज्य को केरलम कहा जाता है। केरल विधानसभा ने इस परिवर्तन की माँग करते हुए 2023 में और फिर जून 2024 में संकल्प पारित किए।
क्या बदला
25 Aug 2026मुख्य लेखकेरल बना केरलम: किसी राज्य का नाम कैसे बदला जाता है
महानदी जल विवाद
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छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी विवाद 2018 में अंतर राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (Inter-State River Water Disputes Act, 1956) के अंतर्गत गठित एक अधिकरण में गया, और राज्य चाहें तो इसे बातचीत से भी सुलझा सकते हैं।
क्या बदला
30 Jul 2026संक्षिप्तछत्तीसगढ़ और ओडिशा केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली एक तकनीकी समिति के माध्यम से बातचीत से समाधान खोजने पर सहमत हुए। PIB, 30 Jul 2026: UNION MINISTER OF JAL SHAKTI CHAIRS MEETING WITH CHIEF MINISTERS OF CHHATTISGARH AND ODISHA TO FACILITATE AN AMICABLE SETTLEMENT OF THE MAHANADI WATER DISPUTE (opens in a new tab)
सोन समझौता
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सोन समझौता सोन नदी के पानी को बाँटता है, जो दाहिने तट की एक सहायक नदी है, मध्य प्रदेश में अमरकंटक के पास निकलती है और पटना के पास गंगा में मिलती है।
- इसका पानी पहली बार 1973 के बाणसागर समझौते के अंतर्गत मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अविभाजित बिहार के बीच बाँटा गया था।
किसी नदी का मामला तय करने के दो रास्ते
- संविधान का अनुच्छेद 262 संसद को यह अधिकार देता है कि वह अंतरराज्यीय नदी जल विवादों के निपटारे के लिए कानून बनाए, और अदालतों को उनसे बाहर रखे।
- अंतर राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (Inter State River Water Disputes Act, 1956) वही कानून है, जिसके अंतर्गत किसी राज्य के माँगने पर केंद्र एक अधिकरण गठित करता है।
- दूसरा रास्ता बातचीत से हुआ समझौता है, जो बिना किसी अधिकरण के ही राज्यों को बाध्य करता है।
- वे कौन सा रास्ता लेते हैं, इससे तय होता है कि पानी कितने समय तक बिना बँटे रहता है।
क्या बदला
1 Sep 2026
- बिहार और झारखंड ने सोन के जल के बँटवारे पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिससे 2000 में झारखंड के अलग होने के बाद से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया।
- अविभाजित बिहार के पास बाणसागर समझौता के अंतर्गत जो 77.5 लाख एकड़ फुट था, उसमें से बिहार को 57.5 लाख एकड़ फुट और झारखंड को 20 लाख एकड़ फुट मिलेंगे।
कावेरी और मेकेदातु
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कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के बीच नदी के उस बँटवारे को लागू करता है जो न्यायाधिकरण ने तय किया और 2018 में उच्चतम न्यायालय ने संशोधित किया।
- मेकेदातु एक बाँध है जिसे कर्नाटक अपने ही क्षेत्र में नदी पर प्रस्तावित करता है।
कावेरी बेसिन में मूल्यांकन
राज्य की रिपोर्ट
राज्य एक प्रारंभिक रिपोर्ट जमा करता है
CWC की जाँच
केंद्रीय जल आयोग जल विज्ञान और अंतरराज्यीय पहलुओं की जाँच करता है
परियोजना रिपोर्ट
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने को मंज़ूरी मिलती है
तकनीकी टिप्पणी
CWC कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण को एक तकनीकी टिप्पणी भेजता है
प्राधिकरण का मत
प्राधिकरण अपना मत देता है, या छह महीने बाद उसकी सहमति मान ली जाती है
अन्य स्वीकृतियाँ
इसके बाद पर्यावरणीय और जनजातीय स्वीकृतियाँ आती हैं
क्या बदला
30 Jul 2026
- कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने कर्नाटक द्वारा तमिलनाडु को प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक छोड़ने के निर्देश को बरकरार रखा।
- मेकेदातु पर केंद्र ने संसद को बताया कि 2018 का उच्चतम न्यायालय का निर्णय कर्नाटक से अन्य राज्यों की अनुमति लेने की अपेक्षा नहीं करता।
- लेकिन किसी भी संशोधित परियोजना रिपोर्ट को केंद्रीय जल आयोग के मूल्यांकन और प्राधिकरण के विचारों की आवश्यकता होगी।
मुख्य परीक्षा: कर्नाटक प्रायः वार्षिक मात्रा तो पूरी कर देता है पर मासिक कार्यक्रम नहीं, इसलिए अनुपालन के आँकड़े और संकट दोनों एक साथ सही हो सकते हैं।
25 Jun 2026
- तमिलनाडु विधानसभा ने 19 जून को सर्वसम्मति से मेकेदातु का विरोध किया और एक न्यायाधिकरण की माँग की।
- उच्चतम न्यायालय ने नवंबर 2025 के उस निर्णय की तमिलनाडु की पुनर्विचार याचिका ख़ारिज कर दी थी जिसने उसकी चुनौती को समय से पहले बताया था।
- कर्नाटक एक संशोधित परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
- तमिलनाडु केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission, CWC) के नए दिशानिर्देशों का भी विरोध करता है, जिनका अनुमानित सहमति प्रावधान यह मानता है कि यदि प्राधिकरण छह महीने में कोई मत न दे तो वह सहमत है।
मुख्य परीक्षा: यह विवाद परियोजना के घोषित पेयजल उद्देश्य से अधिक तटवर्ती राज्यों के बीच विश्वास की कमी से प्रेरित है।
The Hindu, 25 Jun 2026: Furore over the Mekedatu project (opens in a new tab) · The Hindu, 26 Jun 2026: Why is Tamil Nadu opposing the Centre's latest guidelines on Cauvery basin? | Explained (opens in a new tab)
तुंगभद्रा और कृष्णा पंचाट
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तुंगभद्रा कृष्णा की एक सहायक नदी है, जो पश्चिमी घाट से निकलने वाली तुंगा और भद्रा के शिवमोग्गा के पास मिलने से बनती है। 1955 का इसका बाँध कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भूमि सींचता है।
- तुंगभद्रा बोर्ड कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण के तहत आपूर्ति का नियमन करता है, जिसने 1976 में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच 65:35 का हिस्सा तय किया; तय सूत्र और बोर्ड के कारण यह परियोजना काफ़ी हद तक विवादों से मुक्त रही है।
क्या बदला
25 Jun 2026संक्षिप्ततीनों मुख्यमंत्रियों और जल शक्ति मंत्री ने अगस्त 2024 में एक क्रेस्ट गेट बह जाने के बाद नए इस्पात स्पिलवे गेटों का उद्घाटन किया। गाद ने बाँध का भंडारण घटा दिया है, और तेलंगाना चाहता है कि बोर्ड को केंद्रीय जल आयोग के अंतर्गत मज़बूत किया जाए। The Hindu, 25 Jun 2026: Tungabhadra river: Origin, course, dam project and inter-State water sharing explained (opens in a new tab) · The Hindu, 29 Jun 2026: Sharing waters: On the Tungabhadra model (opens in a new tab) · The Hindu, 26 Jun 2026: What is the Rajolibanda Diversion Scheme | Explained (opens in a new tab)