अध्यादेश से उच्चतम न्यायालय की संख्या बढ़ाई गई
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चर्चा में क्यों
2 जून 2026 को पाँच नए न्यायाधीशों ने शपथ ली, जिससे उच्चतम न्यायालय की कार्यरत संख्या 37 हो गई। 16 मई 2026 के एक अध्यादेश ने न्यायालय की स्वीकृत संख्या 34 से 38 कर दी थी, और पाँच में से तीन उसके बनाए पदों पर बैठे हैं।
पृष्ठभूमि
- अनुच्छेद 124(1) संसद को कानून द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त न्यायाधीशों की संख्या तय करने देता है।
- संसद यह उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) अधिनियम, 1956 के माध्यम से करती है। यह संख्या पिछली बार 2019 में बढ़ाई गई थी, मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त 30 से 33।
- पहले हर वृद्धि एक संशोधन अधिनियम से हुई थी। यह वृद्धि अनुच्छेद 123 के अधीन एक अध्यादेश से हुई।
- न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति अनुच्छेद 124(2) के अधीन कॉलेजियम की सिफ़ारिश पर करते हैं।
अध्यादेश का प्रश्न
- अध्यादेश को अधिनियम का बल प्राप्त होता है, पर यदि संसद उसे किसी अधिनियम से न बदले तो वह संसद के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह बाद व्यपगत हो जाता है।
- इसलिए न्यायाधीशों ने ऐसे पदों पर शपथ ली जो अध्यादेश के व्यपगत होने पर समाप्त हो जाते।
- मंत्रिमंडल ने एक विधेयक को पहले ही स्वीकृति दे दी थी, जिससे यह प्रश्न उठता है कि अध्यादेश की आवश्यकता क्यों पड़ी।
- आलोचक इसमें न्यायिक स्वतंत्रता के लिए खतरा देखते हैं: न्यायालय के सामने सबसे बड़ा वादी संघ है, और किसी न्यायाधीश का पद इस पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि कार्यपालिका कोई कानून पारित करवा पाती है या नहीं।
- समर्थकों का उत्तर है कि हर नियुक्ति कॉलेजियम से होकर गई, और संसद की स्वीकृति निश्चित थी।
कारण के रूप में लंबित मामले
- अध्यादेश जारी होने के समय उच्चतम न्यायालय में 92,000 से अधिक मामले लंबित थे।
- अधिक न्यायाधीशों से एक साथ अधिक पीठें बैठ सकती हैं, संविधान पीठों सहित।
- पर केवल संख्या से न्यायालय की विस्तृत अपीलीय सूची या मामलों को सूचीबद्ध करने के ढंग का समाधान नहीं होता।
उद्धृत करने योग्य मामले
- D.C. Wadhwa v. State of Bihar (1987): अध्यादेशों का बार बार पुनः प्रख्यापन संविधान के साथ कपट है।
- Krishna Kumar Singh v. State of Bihar (2017): अध्यादेश बनाना न्यायिक पुनर्विलोकन के अधीन है; उसे विधानमंडल के समक्ष रखना अनिवार्य है।
- Supreme Court Advocates on Record Association v. Union of India (2015): नियुक्तियों में न्यायपालिका की प्रधानता की रक्षा के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को रद्द किया।
आगे की राह
- न्यायालय की संख्या अध्यादेश से नहीं, अधिनियम से तय हो, क्योंकि कोई तात्कालिकता संसद को कानून बनाने से नहीं रोकती।
- अधिक न्यायाधीशों के साथ मामलों की सूची में सुधार भी हो: कम नियमित अपीलें, और नियमित संविधान पीठें।
- रिक्तियाँ तुरंत भरी जाएँ, क्योंकि खाली पड़े स्वीकृत पदों का कोई अर्थ नहीं।
प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य
- उच्चतम न्यायालय की संख्या: भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित 38।
- यह अनुच्छेद 124(1) के अधीन संसद द्वारा कानून से तय होती है; किसी संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं।
- संसद के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह बाद अध्यादेश व्यपगत हो जाता है।
- कॉलेजियम व्यवस्था दूसरे और तीसरे न्यायाधीश मामलों से आई है।
स्रोत: The Hindu, 2 Jun 2026: Five new judges join Supreme Court following increase in sanctioned strength (opens in a new tab) · SCC Online, 18 May 2026: Supreme Court judges increase: the Ordinance, 2026 explained (opens in a new tab) · Supreme Court Observer, 30 Jun 2026: 2026 summer session review (opens in a new tab) · News On AIR, 2 Jun 2026: Five newly appointed Supreme Court judges to take oath today (opens in a new tab)
पहले की कवरेज: उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या · मासिक पत्रिका, June 2026
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