यूरिया: नई निवेश नीति और सब्सिडी की पुरानी समस्या
मुख्य लेखप्रारंभिक और मुख्यJuly 2026
चर्चा में क्यों
15 जुलाई 2026 को मंत्रिमंडल ने नए गैस आधारित यूरिया संयंत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति, 2026 (National Investment Policy for Urea, 2026) को मंज़ूरी दी। जून में आयात मूल्य बढ़ने के कारण वर्ष की उर्वरक सब्सिडी का अनुमान बजट के आँकड़े का दोगुना लगाया गया था।
पृष्ठभूमि
- यूरिया किसानों को सरकार द्वारा तय मूल्य पर बेचा जाता है, जो उसकी लागत से बहुत कम है। अंतर की राशि केंद्र निर्माता या आयातक को चुकाता है।
- अन्य उर्वरक, यानी फॉस्फोरस और पोटाश वाले, पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (Nutrient Based Subsidy) के अंतर्गत आते हैं, जिसमें सब्सिडी तय रहती है और मूल्य बदलने के लिए स्वतंत्र रहता है।
- भारत अपनी खपत का लगभग तीन चौथाई यूरिया स्वयं बनाता है और शेष आयात करता है। अधिकांश संयंत्र प्राकृतिक गैस पर चलते हैं, और उस गैस का भी बड़ा भाग आयातित है।
- इसलिए विदेश में गैस और यूरिया का मूल्य सीधे सब्सिडी के बिल में पहुँच जाता है।
नई नीति क्या करती है
- यह निवेशकों को एक दायरे के भीतर इक्विटी पर प्रतिफल (return on equity) का आश्वासन देती है।
- इसका लक्ष्य आठ या नौ नए संयंत्र हैं, जो प्रति वर्ष लगभग 1 करोड़ टन जोड़ेंगे, जो आयात के अंतर को पाटने के लिए पर्याप्त है।
- यह 2012 की नीति के बाद आई है, जिससे छह नए संयंत्र लगे थे।
सब्सिडी समस्या क्यों है
- राजकोषीय: बिल विश्व मूल्यों के साथ घटता बढ़ता है और इसका बजट बनाना कठिन है।
- मृदा: सस्ते यूरिया का अत्यधिक उपयोग होता है। नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश लगभग 4:2:1 के अनुपात में डाले जाने चाहिए; व्यवहार में नाइट्रोजन इससे कहीं अधिक डाला जाता है।
- पर्यावरण: अतिरिक्त नाइट्रोजन भूजल को प्रदूषित करता है और नाइट्रस ऑक्साइड छोड़ता है, जो एक ग्रीनहाउस गैस है।
- रिसाव: सब्सिडी वाला यूरिया उद्योगों की ओर और सीमा पार भेज दिया जाता है।
- निर्भरता: देश में यूरिया बनाने के लिए भी आयातित गैस चाहिए, इसलिए यूरिया में आत्मनिर्भरता ऊर्जा में आत्मनिर्भरता नहीं है।
आगे की राह
- यूरिया को पोषक तत्व आधारित सब्सिडी के अंतर्गत लाया जाए, ताकि मूल्य संतुलित उपयोग का संकेत दें।
- समय के साथ किसान को प्रति एकड़ या पोषक तत्व की प्रति इकाई प्रत्यक्ष अंतरण की ओर बढ़ा जाए।
- नैनो यूरिया, लेपित यूरिया और जैविक स्रोतों को बढ़ावा दिया जाए।
- मात्रा तय करने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उपयोग किया जाए।
प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य
- यूरिया नाइट्रोजन देता है; इसमें 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है।
- यूरिया वैधानिक मूल्य नियंत्रण के अंतर्गत है; फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरक पोषक तत्व आधारित सब्सिडी के अंतर्गत हैं, जो 2010 से लागू है।
- खेती के लिए बनाया या आयात किया गया सारा यूरिया नीम लेपित होता है।
- भारत अपने यूरिया का लगभग एक चौथाई आयात करता है।
- उर्वरक विभाग रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत है।
यह भी देखें: उर्वरक पंजीकरण और पोषक तत्व उपयोग दक्षता
स्रोत: Press Information Bureau, 15 Jul 2026: Cabinet approves the National Investment Policy for Urea 2026 (opens in a new tab) · The Hindu, 15 Jul 2026: Cabinet approves ₹1.27 lakh crore for Semicon Mission 2.0, for mobile manufacturing, new highways (opens in a new tab) · The Indian Express, 10 Jun 2026
पहले की कवरेज: यूरिया नीति और उर्वरक सब्सिडी · मासिक पत्रिका, July 2026
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