विक्रम-1: एक निजी भारतीय रॉकेट कक्षा में पहुँचा
मुख्य लेखप्रारंभिक और मुख्यJuly 2026
चर्चा में क्यों
हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा निर्मित विक्रम-1 ने 18 जुलाई 2026 को श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी और अपने पेलोड निम्न पृथ्वी कक्षा में स्थापित किए। यह कक्षा तक पहुँचने वाला पहला निजी रूप से निर्मित भारतीय रॉकेट है।
पृष्ठभूमि
- 2020 तक भारत में केवल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ही रॉकेट बनाता और प्रक्षेपित करता था।
- 2020 के अंतरिक्ष सुधारों ने यह क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खोला और उन्हें अधिकृत करने तथा सहायता देने के लिए IN-SPACe की स्थापना की।
- उप-कक्षीय (suborbital) उड़ान अंतरिक्ष में प्रवेश करके वापस गिर जाती है। कक्षीय उड़ान कक्षा में बने रहने के लिए आवश्यक गति तक पहुँचती है, जो कहीं अधिक कठिन है।
- पहले की निजी उड़ानें, 2022 में स्काईरूट की विक्रम-एस और 2024 में अग्निकुल की अग्निबाण, उप-कक्षीय थीं।
रॉकेट
- विक्रम-1 लगभग 22 मीटर ऊँचा चार चरणों वाला यान है: तीन ठोस चरण और एक पुनः प्रज्वलित होने योग्य तरल ऊपरी चरण।
- यह निम्न पृथ्वी कक्षा में लगभग 350 किग्रा पहुँचा सकता है, जो इसे एक लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान बनाता है।
- इसका ढाँचा कार्बन फ़ाइबर कंपोज़िट का है, जो समान मज़बूती पर इस्पात से हल्का है।
- इसका तरल इंजन एक ही टुकड़े के रूप में 3D प्रिंट किया गया है, जिससे वे जोड़ और सील हट जाते हैं जहाँ इंजनों से रिसाव होता है।
उड़ान
- आगमन नामक मिशन ने छह प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पेलोड लगभग 450 किमी की कक्षा में स्थापित किए।
- संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरा देश है जिसका निजी उद्योग कक्षा तक पहुँचा है।
- यह एक विकासात्मक उड़ान थी; वाणिज्यिक सेवा से पहले दो और उड़ानें नियोजित हैं।
यह क्यों मायने रखता है
- सुधारों से अब तक निजी उपग्रह और अनुप्रयोग बने थे; इसमें अब प्रक्षेपण क्षमता जुड़ती है।
- लघु उपग्रह प्रक्षेपण बाज़ार का सबसे तेज़ी से बढ़ता भाग हैं, और एक छोटा रॉकेट उन्हें माँग पर प्रक्षेपित कर सकता है।
- यह ISRO के अपने यानों से आगे भारत की प्रक्षेपण क्षमता को बढ़ाता है, ऐसे समय में जब भारत वर्ष में कम प्रक्षेपण करता है।
क्या शेष है
- कोई रॉकेट केवल बार बार की विश्वसनीय उड़ानों से ही व्यवसाय बनता है।
- भारत में अभी कोई अंतरिक्ष गतिविधि कानून नहीं है, इसलिए निजी प्रक्षेपण से हुई क्षति का दायित्व क़ानून पर नहीं, नीति पर टिका है।
- निजी कंपनियाँ अब भी ISRO के प्रक्षेपण पैड और परीक्षण सुविधाओं पर निर्भर हैं।
आगे की राह
- एक अंतरिक्ष गतिविधि कानून पारित किया जाए जो लाइसेंस, दायित्व और बीमा तय करे।
- सरकारी प्रक्षेपण अनुबंधों के माध्यम से निजी कंपनियों को सुनिश्चित माँग दी जाए।
- कुलशेखरपट्टिनम लघु उपग्रह प्रक्षेपण परिसर का किसी निजी संचालक को हस्तांतरण पूरा किया जाए, और परीक्षण सुविधाएँ उन्हीं शर्तों पर खोली जाएँ।
प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य
- विक्रम-1: स्काईरूट एयरोस्पेस, हैदराबाद; चार चरण, जिनमें से तीन ठोस।
- मिशन आगमन; श्रीहरिकोटा के पहले प्रक्षेपण पैड से प्रक्षेपित।
- विक्रम-एस (2022) और अग्निबाण (2024) उप-कक्षीय थीं।
- संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद, निजी कक्षीय प्रक्षेपण वाला भारत तीसरा देश है।
यह भी देखें: IN-SPACe · भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023
स्रोत: PIB, 18 Jul 2026: Vikram-1 Mission Strengthens India's Position in the Global Commercial Market: Dr. Jitendra Singh (opens in a new tab) · PIB, 23 Jul 2026: ISRO missions (opens in a new tab) · The Hindu, 18 Jul 2026: The materials and methods that made the Vikram-1 launch unique (opens in a new tab) · The Indian Express, 18 Jul 2026: Vikram-1 becomes India's first privately built rocket to reach orbit (opens in a new tab)
पहले की कवरेज: Vikram-1 · मासिक पत्रिका, July 2026
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