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चर्चा में क्यों

उच्चतम न्यायालय ने 17 अगस्त 2026 को SHANTI अधिनियम, 2025 में दायित्व की सीमाओं को दी गई चुनौती पर नोटिस जारी किया। उसने पूछा कि क्या किसी क़ानून में लिखी गई सीमा किसी संवैधानिक न्यायालय को परमाणु दुर्घटना के पीड़ितों को उचित मुआवज़ा देने से रोक सकती है।

पृष्ठभूमि

  • परमाणु दायित्व यह प्रश्न है कि किसी दुर्घटना के बाद पीड़ितों को कौन भुगतान करेगा, और कितना।
  • 2025 तक इसे परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 नियंत्रित करता था। यह संचालक को उपकरण आपूर्तिकर्ता से धन वसूलने देता था, जिससे विदेशी रिएक्टर विक्रेता दूर रहे।
  • परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के अंतर्गत परमाणु ऊर्जा सरकार का एकाधिकार थी।
  • भारत के कार्यक्रम के तीन चरण हैं: प्राकृतिक यूरेनियम पर भारी जल रिएक्टर, प्लूटोनियम पर फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर, और अंत में थोरियम पर रिएक्टर, जिसके बड़े भंडार भारत के पास हैं।
SHANTI अधिनियम के अंतर्गत परमाणु दुर्घटना के बाद कौन भुगतान करता है: संचालक, फिर केंद्र, आपूर्तिकर्ताओं को छूट, पुराने क़ानून के साथ तुलना में।
SHANTI अधिनियम के अंतर्गत परमाणु दुर्घटना के बाद कौन भुगतान करता है: संचालक, फिर केंद्र, आपूर्तिकर्ताओं को छूट, पुराने क़ानून के साथ तुलना में।स्रोत: The Hindu, 18 August 2026; Press Information Bureau, August 2026

SHANTI अधिनियम ने क्या बदला

  • भारत के रूपांतरण के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और उन्नति अधिनियम, 2025 (SHANTI) ने दोनों पुराने अधिनियमों का स्थान लिया।
  • निजी कंपनियाँ लाइसेंस के अंतर्गत परमाणु संयंत्रों की स्वामी हो सकती हैं और उन्हें चला सकती हैं।
  • परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड एक वैधानिक निकाय बन गया।
  • संचालक का दायित्व ₹3,000 करोड़ तक रिएक्टर के आकार के अनुसार श्रेणीबद्ध है; उससे आगे केंद्र का दायित्व 300 मिलियन विशेष आहरण अधिकारों तक सीमित है; आपूर्तिकर्ताओं को छूट है।

मामला

  • याचिकाकर्ताओं ने इन सीमाओं की तुलना चेरनोबिल और फ़ुकुशिमा की अनुमानित लागतों से की, जो कहीं अधिक थीं।
  • सीमा के पक्ष में तर्क यह है कि इससे जोखिम बीमा योग्य बनता है, और इसके बिना कोई निजी संचालक या आपूर्तिकर्ता नहीं आएगा।
  • विरोध में तर्क यह है कि सीमा से ऊपर जो कुछ है वह पीड़ित उठाते हैं, जो अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार को छूता है।

कार्यक्रम कहाँ खड़ा है

  • भारत के पास लगभग 8.8 GW के 24 रिएक्टर हैं, और लक्ष्य 2047 तक 100 GW है।
  • दस स्वदेशी 700 MW दाबित भारी जल रिएक्टर एक साथ बनाए जा रहे हैं, ताकि 2031 से 2032 तक क्षमता लगभग 22.5 GW हो जाए।
  • कलपक्कम के प्रोटोटाइप फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने अप्रैल 2026 में पहली क्रांतिकता प्राप्त की, जिससे दूसरा चरण खुला।
  • 2033 तक कम से कम पाँच स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टर चलने हैं; भारत तीन प्रकार डिज़ाइन कर रहा है, जिनमें 220 MWe का भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर भी है।

आगे की राह

  • दायित्व का प्रश्न जल्दी सुलझाया जाए, क्योंकि निवेशक और आपूर्तिकर्ता न्यायालय की प्रतीक्षा करेंगे।
  • अधिनियम के अंतर्गत नियम बनाए जाएँ, जो अभी तैयार किए जा रहे हैं।
  • नियामक को उन संचालकों से स्वतंत्र रखा जाए जिन्हें वह लाइसेंस देता है, निजी हों या सार्वजनिक।
  • निजी संयंत्रों के आने के साथ प्रयुक्त ईंधन और अपशिष्ट की योजना बनाई जाए।

प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य

  • SHANTI अधिनियम ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 का स्थान लिया।
  • इसके अंतर्गत आपूर्तिकर्ताओं को दायित्व से छूट है।
  • दाबित भारी जल रिएक्टर प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग करता है और इसे संवर्धन की आवश्यकता नहीं होती।
  • फ़ास्ट ब्रीडर रिएक्टर शीतलक के रूप में तरल सोडियम का उपयोग करता है और दूसरे चरण का है।
  • लघु मॉड्यूलर रिएक्टर लगभग 300 MWe तक का होता है।