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UNCLOS: तट से 'क्षेत्र' तक के समुद्री जोन

प्रारंभिक और मुख्यइस पर समसामयिकी: महासागर, ध्रुवीय और पृथ्वी विज्ञान मिशन

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS), जिस पर 1982 में हस्ताक्षर हुए और जो 1994 से लागू है, समुद्र को किसी देश की आधार रेखा से नापी गई पट्टियों में बाँटता है, और हर पट्टी में अलग अधिकार मिलते हैं। राज्यक्षेत्रीय समुद्र, 12 समुद्री मील तक, संप्रभु राज्यक्षेत्र है जिस पर केवल निर्दोष मार्ग का बंधन है। सन्निहित क्षेत्र, 24 समुद्री मील तक, राज्य को सीमा शुल्क, कर, आप्रवासन और स्वास्थ्य कानून लागू करने देता है। अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ), 200 समुद्री मील तक, जल, समुद्रतल और उपमृदा के संसाधनों पर संप्रभु अधिकार देता है, पर संप्रभुता नहीं: सभी जहाज़ और विमान वहाँ से स्वतंत्र रूप से गुज़रते हैं। महाद्वीपीय मग्नतट 200 समुद्री मील से आगे, अधिकतम 350 तक जा सकता है, जहाँ भूविज्ञान महाद्वीपीय मग्नतट की सीमाओं संबंधी आयोग के समक्ष सिद्ध किया गया हो। उससे आगे खुला समुद्र है, जो सबके लिए खुला है, और उसके नीचे 'क्षेत्र' (the Area) है, अर्थात राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से परे का समुद्रतल, जो मानवजाति की साझी विरासत है और जिसे अंतरराष्ट्रीय समुद्रतल प्राधिकरण चलाता है।

समुद्र के क्षेत्र, आधार रेखा से बाहर की ओर

The zones of the sea from the baseline outwards A cross section from the coast on the left to open ocean on the right. Measured from the baseline: the territorial sea to 12 nautical miles, where the State is sovereign subject to innocent passage; the contiguous zone to 24, for customs, tax, immigration and health; the exclusive economic zone to 200, giving sovereign rights over resources while all ships and aircraft pass freely; the continental shelf, which may run to 350 where the geology is proved to the Commission on the Limits of the Continental Shelf; and beyond, the high seas above and the Area below, the common heritage of mankind run by the International Seabed Authority, where India holds nodule and sulphide contracts. Coast baseline 12 nm 24 nm 200 nm 350 nm Territorial Contiguous Exclusive economic zone High seas Continental shelf The Area India's nodule and sulphide contracts Territorial sea, to 12 nm: sovereignty, subject to innocent passage Contiguous zone, to 24 nm: customs, tax, immigration, health Exclusive economic zone, to 200 nm: resource rights; free passage for all Continental shelf, to 350 nm: seabed rights only, proved to the CLCS High seas and the Area, beyond: open to all; the seabed run by the ISA
पट्टियाँ जैसे जैसे बाहर जाती हैं, अधिकार संप्रभुता से घटकर संसाधन अधिकार और फिर शून्य हो जाते हैं; उनसे परे का समुद्रतल सबका है और उसे ISA चलाता है।Source: UNCLOS Parts II, V, VI, VII and XI
  • एक समुद्री मील 1,852 मीटर का होता है, इसलिए EEZ आधार रेखा से लगभग 370 km तक पहुँचता है। भारत के क्षेत्र देश के भीतर समुद्री क्षेत्र अधिनियम, 1976 से तय होते हैं, और भारत ने UNCLOS का अनुसमर्थन 1995 में किया।
  • 'क्षेत्र' का शासन किंग्स्टन, जमैका स्थित अंतरराष्ट्रीय समुद्रतल प्राधिकरण करता है, जो अन्वेषण अनुबंध देता है और अब भी वह खनन संहिता लिख रहा है जो दोहन की अनुमति देगी; विवाद हैम्बर्ग स्थित अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून अधिकरण में जाते हैं।
  • भारत के पास मध्य हिंद महासागर द्रोणी में बहुधात्विक पिंडों के लिए ISA अन्वेषण अनुबंध है (2002 से) और बहुधात्विक सल्फाइड के लिए दो अनुबंध हैं, एक मध्य तथा दक्षिण पश्चिम हिंद कटक पर (2016 से) और दूसरा अरब सागर की कार्ल्सबर्ग कटक पर, जिससे वह दो अनुबंध रखने वाला पहला देश बना, और उसने एक और क्षेत्र के लिए आवेदन किया है। उसका गहरे समुद्र मिशन और समुद्रयान इसी समुद्रतल के लिए बने हैं।
  • 'क्षेत्र' के ऊपर के खुले समुद्र को 2023 में अपनी संधि मिली: राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से परे जैव विविधता (BBNJ) समझौता, जो खुले समुद्र में समुद्री संरक्षित क्षेत्र बनाता है, समुद्री आनुवंशिक संसाधनों के लाभ का साझा करता है और पर्यावरणीय आकलन कराता है; साठवें अनुसमर्थन के बाद यह जनवरी 2026 में लागू हुआ।
  • ये क्षेत्र ही कारण हैं कि एक ही समुद्रतल संसाधन विवाद बन सकता है: मत्स्यन अधिकार 200 समुद्री मील पर समाप्त हो जाते हैं, मग्नतट के अधिकार उससे आगे जा सकते हैं, और 'क्षेत्र' में पिंड खनन के लिए ISA अनुबंध चाहिए जिसका समर्थन केवल कोई प्रायोजक राज्य कर सकता है।

मुख्य परीक्षा: UNCLOS भारत को 200 समुद्री मील तक संसाधनों पर अधिकार और उससे आगे के समुद्रतल पर दावा देता है, पर जिन गहरे समुद्री खनिजों की उसे चाह है वे 'क्षेत्र' में हैं, जहाँ भारत अनेक अनुबंधकर्ताओं में से एक है और जिनके नियम ISA ने अभी पूरे नहीं लिखे हैं।

UPSC पूछ चुका है

  • Prelims 2022: समुद्री कानून के अंतर्गत समुद्र के क्षेत्र, और प्रत्येक में तटीय राज्य क्या कर सकता है
  • Prelims 2021: अंतरराष्ट्रीय जल में समुद्रतल अन्वेषण का लाइसेंस कौन देता है

अतिरिक्त पठन: The High Seas Biodiversity Treaty: an introduction (IUCN)

यह भी देखें: Deep sea minerals · भारत का गहरे समुद्र खनन कार्यक्रम · गहरे समुद्र मिशन

यह पृष्ठ अंग्रेज़ी पृष्ठ का मशीनी अनुवाद है। संदेह होने पर अंग्रेज़ी पाठ ही प्रामाणिक है। अनुवाद की त्रुटि बताएँ