- अधिकरण (Adhikarana)
- अर्थशास्त्र का एक खंड; अर्थशास्त्र में ऐसे 15 खंड हैं।
- तंत्र और आवाप (Tantra and avapa)
- आंतरिक प्रशासन और अंतरराज्यीय संबंध, अर्थशास्त्र के दो विषय।
- विजिगीषु (Vijigishu)
- विजय की आकांक्षा रखने वाला, जिसके दृष्टिकोण से अर्थशास्त्र अपना तर्क रखता है।
- अभिलेख (Edict)
- राजकीय आदेश या घोषणा।
- देवानंपिय पियदसी (Devanampiya Piyadasi)
- वे नाम जिनसे अशोक अपने अधिकांश अभिलेखों में स्वयं को पुकारते हैं; ये अशोक के ही नाम हैं, यह श्रीलंका के दीपवंश और महावंश से ज्ञात होता है।
- धम्म (Dhamma)
- नैतिक आचरण और धर्मपरायण जीवन का अशोक का नैतिक नियम, जो बौद्ध धर्म से व्यापक था।
- धम्म महामात्र (Dhamma Mahamatra)
- धम्म के प्रचार के लिए अशोक द्वारा नियुक्त अधिकारी।
- भेरीघोष और धम्मघोष (Bherighosha and Dhammaghosha)
- भौतिक विजय और सांस्कृतिक विजय: कलिंग के बाद अशोक पहली से दूसरी की ओर मुड़े।
- सप्तांग राज्य (Saptanga rajya)
- अर्थशास्त्र का सात अंगों वाला राज्य: स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोश, दंड और मित्र।
- संस्था और संचार (Sanstha and sanchara)
- एक ही क्षेत्र में तैनात स्थिर गुप्तचर, और घूमने वाले गुप्तचर।
- पटिवेदक (Pativedaka)
- एक विशेष संवाददाता, जो पुलिसानी के साथ राजा को जनमत की जानकारी देता रहता था।
- समाहर्ता (Samahartri)
- राजस्व का मुख्य संग्रहकर्ता।
- सन्निधाता (Samnidhatri)
- कोषाध्यक्ष, जो राजकीय भंडारों का भी प्रभारी था।
- स्थानीय (Sthaniya)
- 800 गाँवों का प्रशासन करने वाला मुख्यालय।
- द्रोणमुख (Dronamukha)
- 400 गाँवों का प्रशासन करने वाला मुख्यालय।
- कार्वटिक (Karvatika)
- 200 गाँवों का प्रशासन करने वाला मुख्यालय।
- संग्रहण (Samgrahana)
- 10 गाँवों का प्रशासन करने वाला मुख्यालय।
- स्थानिक (Sthanika)
- जिलों जैसी इकाइयों का अधिकारी।
- गोप (Gopa)
- स्थानिक के अधीन एक अधिकारी, जो पाँच से दस गाँवों का प्रभारी था।
- ग्रामिक (Gramika)
- गाँव का मुखिया।
- अध्यक्ष (Adhyaksha)
- किसी विभाग का प्रभारी अधीक्षक।
- मौल और भृतक (Maula and bhritaka)
- वंशानुगत योद्धा, और भाड़े के सैनिक।
- भाग (Bhaga)
- उपज में राजा का हिस्सा, मौर्यों के अधीन छठा भाग।
- हिरण्य (Hiranya)
- केवल नकद में चुकाया जाने वाला कर।
- पिंडकर (Pindakara)
- गाँवों के एक समूह पर निर्धारित कर।
- प्रणय (Pranaya)
- कोष खाली हो जाने पर लगाया जाने वाला आपातकालीन कर।
- क्षेत्रिक और उपवास (Kshetrika and upavasa)
- खेत का स्वामी, और काश्तकार।
- विष्टि (Vishti)
- राज्य द्वारा बलपूर्वक कराया जाने वाला बिना पारिश्रमिक का श्रम।
- शुल्क (Shulka)
- आयात और निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर लगने वाली चुंगी।
- शून्यनिवेश (Shunyanivesha)
- खाली पड़ी भूमि पर 100 से 500 परिवारों के नए गाँव बसाना, जिनमें अधिकतर शूद्र होते थे।
- पण और माषक (Pana and mashaka)
- मोर, पहाड़ी और अर्धचंद्र वाला चाँदी का आहत सिक्का, और ताँबे का सिक्का।
- धर्मस्थीय और कंटकशोधन (Dharmasthiya and kantakashodhana)
- दीवानी मामलों के न्यायालय, और फौजदारी मामलों के न्यायालय।
- षाड्गुण्य (Shadgunya)
- विजिगीषु की छह नीतियाँ: संधि, विग्रह, आसन, यान, संश्रय और द्वैधीभाव।
- असुरविजयी, लोभविजयी, धर्मविजयी (Asuravijayin, lobhavijayin, dharmavijayin)
- आसुरी विजेता जो छीन लेता है और मार डालता है, लोभी विजेता, और धर्मपरायण विजेता जो अधीनता स्वीकार कर लिए जाने से संतुष्ट हो जाता है।
- जीनोस (Genos)
- वंश पर आधारित कुल या अन्य समूह के लिए एक यूनानी शब्द।
- दास और आहितक (Dasa and ahitaka)
- दास, और ऋण लेते समय ऋणदाता के पास गिरवी रखा गया व्यक्ति।
- कर्मकार (Karmakara)
- मज़दूरी पर काम करने वाला व्यक्ति।
- अंत्यावसायी (Antavasayin)
- शाब्दिक अर्थ, अंत में रहने वाले: चांडाल और श्वपाक जैसे लोग, जिनके बारे में माना जाता था कि वे बस्तियों के किनारे रहते हैं।
- आटविक (Atavika)
- जंगली वन जनजातियाँ।
- द्रव्यवन और हस्तिवन (Dravyavana and hastivana)
- लकड़ी और धातुएँ देने वाले द्रव्य वन, और हाथियों के वन।