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English — अंग्रेज़ी में पढ़ेंश्रम संहिताएँ, गिग कार्य और सामाजिक सुरक्षा
काम का कानून: श्रम संहिताएँ, गिग कार्य और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा।
सामाजिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत कर्मचारी भविष्य निधि
Copy link to सामाजिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत कर्मचारी भविष्य निधिप्रारंभिक और मुख्य
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत तीन योजनाएँ चलाता है: भविष्य निधि, पेंशन और जमा से जुड़ा बीमा।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 उन चार श्रम संहिताओं में से एक है जो 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समेकित करती हैं, और यह कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 को अपने में समाहित करती है।
- नियोक्ता और कर्मचारी दोनों वेतन का 12% अंशदान करते हैं; कुछ अधिसूचित प्रतिष्ठानों के लिए यह 10% है।
- नियोक्ता के 12% में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है, और केंद्र 1.16% जोड़ता है।
- अंशदान एक वेतन सीमा तक के वेतन पर देय होता है, जो यह भी तय करती है कि किसे अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए; यह 2014 से सितंबर 2026 तक ₹15,000 प्रति माह थी, और EPS के तहत न्यूनतम पेंशन 2014 से ₹1,000 प्रति माह बनी हुई है।
क्या बदला
18 Sep 2026नया जोड़ा गया
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने EPFO की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने को मंज़ूरी दी, जिससे 51 लाख से अधिक और कर्मचारी अनिवार्य दायरे में आने की आशा है।
- श्रम मंत्रालय ने 17 सितंबर को सामाजिक सुरक्षा संहिता की धारा 2(89) के अंतर्गत नई सीमा राजपत्र में अधिसूचित की।
The Hindu, 18 Sep 2026: What does the latest revision to the EPFO wage ceiling entail? (opens in a new tab) · The Indian Express, 17 Sep 2026
13 Jul 2026नयानया जोड़ा गया
- 29 जून को 2026 की एक पेंशन योजना और एक जमा से जुड़ी बीमा योजना के साथ अधिसूचित कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 ने 1952 की योजना का स्थान लिया।
- यह निकासी के 13 आधारों को तीन में समेटती है और अपेक्षा करती है कि अंशदान का 25% खाते में बना रहे।
- यह ठेका श्रमिकों की भविष्य निधि बकाया राशि के लिए प्रधान नियोक्ता को उत्तरदायी बनाती है।
- 12 जुलाई को EPFO ने उन प्रतिष्ठानों के लिए छह महीने की माफ़ी योजना, 2026 (Amnesty Scheme, 2026) खोली जिनके पास आयकर से मान्यता प्राप्त भविष्य निधि ट्रस्ट हैं पर औपचारिक छूट नहीं है, ताकि वे संहिता के अंतर्गत नियमित हो सकें।