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मासिक पत्रिका, August 2026 · वैश्विक मामले और अंतरराष्ट्रीय संबंध › पाकिस्तान

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स्थगित सिंधु जल संधि: मध्यस्थता न्यायालय का निर्णय और भारत का उत्तर

मुख्य लेखप्रारंभिक और मुख्यAugust 2026

चर्चा में क्यों

31 अगस्त 2026 को पाकिस्तान के अनुरोध पर गठित मध्यस्थता न्यायालय ने कहा कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को "स्थगित" रखने का संधि या अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है, और संधि भारत पर बाध्यकारी बनी हुई है। भारत ने कुछ ही घंटों में यह कहते हुए निर्णय को अस्वीकार कर दिया कि उसने इस न्यायालय को कभी मान्यता नहीं दी।

पृष्ठभूमि

  • विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई 1960 की संधि भारत को तीन पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलुज) और पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) देती है, जिन पर भारत डिज़ाइन सीमाओं के भीतर नदी प्रवाह आधारित जलविद्युत बना सकता है।
  • विवाद चरणों में आगे बढ़ते हैं: स्थायी सिंधु आयोग, फिर एक तटस्थ विशेषज्ञ, फिर एक मध्यस्थता न्यायालय। संधि में बाहर निकलने का कोई प्रावधान नहीं है।
  • 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के बाद भारत ने संधि को तब तक स्थगित रखा जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन नहीं छोड़ता।
  • भारत स्वयं न्यायालय पर ही विवाद करता है: उसका कहना है कि किशनगंगा और रतले परियोजनाओं के प्रश्न तटस्थ विशेषज्ञ के हैं, और विश्व बैंक ने साथ में एक न्यायालय नियुक्त करके संधि का उल्लंघन किया।
भारत और पाकिस्तान के बीच बँटी सिंधु प्रणाली की छह नदियाँ, संधि की विवाद निपटान की तीन चरणों वाली सीढ़ी और उसमें 2026 के निर्णय का स्थान।
भारत और पाकिस्तान के बीच बँटी सिंधु प्रणाली की छह नदियाँ, संधि की विवाद निपटान की तीन चरणों वाली सीढ़ी और उसमें 2026 के निर्णय का स्थान।स्रोत: Ministry of External Affairs; The Hindu

न्यायालय ने क्या कहा

  • "स्थगन" संधि के लिए अज्ञात है और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए भी; कोई संधि इस तरह एक पक्ष द्वारा निलंबित नहीं की जा सकती।
  • संधि पूरी तरह लागू है: pacta sunt servanda, यानी समझौतों का पालन होना चाहिए।
  • अंतरिम उपाय के रूप में, भारत तटस्थ विशेषज्ञ के निर्णय के 90 दिन बाद तक, जो जुलाई 2027 में अपेक्षित है, रतले बाँध की दीवार और विद्युत अंतर्ग्रहण को तय स्तरों से ऊपर कंक्रीट नहीं कर सकता।
  • मई में इसी न्यायालय ने किशनगंगा और रतले में अधिकतम पौंडेज पर निर्णय दिया था; भारत ने उस निर्णय को भी शून्य और अमान्य कहा।

भारत का पक्ष

  • भारत संधि से हटा नहीं है। स्थगन का अर्थ है कि उसने अपने अधिकार बनाए रखते हुए संधि में दी गई बैठकें, आँकड़ों का आदान प्रदान और दौरे रोक दिए हैं।
  • उसका कहना है कि संधि पुरानी हो चुकी है: एक अलग युग के लिए हस्ताक्षरित, जिसमें जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या या आतंकवाद का कोई प्रावधान नहीं।
  • उसका कहना है कि न्यायालय अवैध रूप से गठित है और वह इसकी कार्यवाही में भाग नहीं लेगा।
  • उसने फिर भी मानवीय आधार पर राजनयिक माध्यमों से पाकिस्तान के साथ बाढ़ चेतावनियाँ साझा की हैं, जैसे जुलाई की चिनाब बाढ़ में।

कानूनी और राजनीतिक प्रश्न

  • संधि में बाहर निकलने का कोई प्रावधान नहीं है। भौतिक उल्लंघन और परिस्थितियों के मूलभूत परिवर्तन पर संधियों के कानून पर वियना अभिसमय (Vienna Convention on the Law of Treaties) के नियम प्रथागत कानून माने जाते हैं, यद्यपि कोई भी देश इसका पक्षकार नहीं है और यह 1960 की संधि पर सीधे लागू नहीं होता। भारत ने औपचारिक रूप से इनमें से कोई आधार नहीं उठाया है।
  • पाकिस्तान निर्णय को अपनी जीत मानता है; जो पक्ष न्यायालय को मान्यता नहीं देता उसके विरुद्ध निर्णय लागू कराने का कोई तंत्र नहीं है।
  • वास्तविक दबाव जल पर है: पूर्वी नदियाँ पहले से भारत की हैं; पश्चिमी नदियों पर भारत क्या कर सकता है, यह भूगोल और उसके बनाए बाँधों से सीमित है।
  • पश्चिमी जल को मोड़ने के किसी भी प्रयास में वर्षों का निर्माण लगेगा।

आगे की राह

  • स्थगन का उपयोग संधि के आधुनिकीकरण के लिए करना: जलवायु आँकड़े, गाद, भूजल और विवाद निपटान की तेज़ सीढ़ी।
  • संधि जिन नदी प्रवाह आधारित परियोजनाओं की पहले से अनुमति देती है उन्हें बनाना, क्योंकि भारत का प्रभाव वहीं है।
  • मानवीय बाढ़ आँकड़े भेजते रहना, जिसमें कुछ ख़र्च नहीं होता और भारत की साख बनी रहती है।
  • तय करना कि वियना अभिसमय को औपचारिक रूप से उठाया जाए या नहीं, ताकि भारत के पक्ष का एक घोषित कानूनी आधार हो।

प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य

  • संधि पर 1960 में हस्ताक्षर हुए, विश्व बैंक की मध्यस्थता से।
  • पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलुज) भारत को; पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) पाकिस्तान को।
  • स्थायी सिंधु आयोग में दोनों ओर से एक एक आयुक्त होता है और इसे वर्ष में कम से कम एक बार मिलना होता है; इसकी पिछली बैठक मई 2022 में हुई।
  • किशनगंगा झेलम की एक सहायक नदी पर है; रतले चिनाब पर है।
  • भारत ने संधि को 23 अप्रैल 2025 को स्थगित किया।

स्रोत: The Hindu, 31 Aug 2026: Citing lack of jurisdiction, India rejects Hague court's Indus Waters Treaty ruling (opens in a new tab) · LiveLaw, 31 Aug 2026: India must continue to honour Indus Waters Treaty with Pakistan, cannot keep it in abeyance: Permanent Court of Arbitration (opens in a new tab) · ThePrint, 31 Aug 2026: Indus Waters Treaty Hague ruling: the tussle over India's abeyance decision, explained (opens in a new tab) · DD India, 4 Aug 2026: MEA calls Pakistan occupied Kashmir elections a farce (opens in a new tab) · DD India, 5 Aug 2026: India rejects Pakistan's Youm-e-Istehsal observance (opens in a new tab) · DD India, 11 Aug 2026: India urges global accountability for Pakistan over PoJK rights violations (opens in a new tab) · The Hindu, 19 Jun 2026: India calls Pakistan a 'Frankenstein state' at U.N. (opens in a new tab) · The Hindu, 17 May 2026: Morning Digest: India rejects award on Indus Waters Treaty (opens in a new tab) · News On AIR, 1 Jul 2026: India condemns demolition of historic 125 year old gurdwara in Pakistan (opens in a new tab) · News On AIR, 25 Jul 2026: UN human rights agency voices concern over unrest in PoJK (opens in a new tab) · News On AIR, 25 Jul 2026: India expresses disappointment over UN's silence on repression in PoJK (opens in a new tab) · News On AIR, 25 Jul 2026: MEA reiterates J&K, Ladakh including PoK are integral parts of India (opens in a new tab) · News On AIR, 25 Jul 2026: Indus Waters Treaty remains in abeyance until Islamabad abjures support for cross border terrorism (opens in a new tab)

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