VidBodh AcademyThe art and science of civil services preparation
English — अंग्रेज़ी में पढ़ें

पेरिस समझौता: यह कैसे काम करता है

प्रारंभिक और मुख्यइस पर समसामयिकी: UNFCCC वार्ताएँ और पेरिस ढाँचा

पेरिस समझौता, जो दिसंबर 2015 में अंगीकृत हुआ और 4 नवंबर 2016 से लागू है, वह संधि है जिसके अंतर्गत अब विश्व जलवायु कार्रवाई पर वार्ता करता है। इसका लक्ष्य तापमान वृद्धि को 2°C से काफ़ी नीचे रखना है, साथ ही 1.5°C का प्रयास करना। क्योटो प्रोटोकॉल के विपरीत यह किसी देश का लक्ष्य तय नहीं करता: हर पक्षकार हर पाँच वर्ष में अपना राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contribution, NDC) स्वयं लिखता है, और हर बार का पिछले से अधिक कठोर होना चाहिए। पाँच तंत्र इसे चलाते हैं: वैश्विक स्टॉकटेक, अनुकूलन पर वैश्विक लक्ष्य, जलवायु वित्त, अनुच्छेद 6 के कार्बन बाज़ार, और हानि और क्षति से निपटने के लिए कोष।

पेरिस समझौते के पाँच तंत्र

The Paris Agreement as a wheel of five mechanisms At the hub, the goal of 1.5 degrees and well below 2 degrees. Around it a ring for the Fund for responding to Loss and Damage, agreed 2022 and set up 2023. Five spokes lead to the mechanisms: Nationally Determined Contributions every five years, India's 2031 to 2035 NDC filed April 2026; the Global Stocktake every five years, first 2023 and second 2028; the adaptation goal under Article 7; finance, 100 billion dollars a year met in 2022 and the new goal of at least 300 billion a year by 2035 with a call for 1.3 trillion; and carbon markets under Article 6.2, 6.4 as the Paris Agreement Crediting Mechanism, and 6.8. Fund for responding to Loss and Damage agreed 2022, set up 2023 1.5°C well below 2°C NDC every 5 years; India's 2031 to 2035 NDC filed April 2026 Global Stocktake every 5 years: first 2023, second 2028 Finance 100 bn a year, met in 2022 NCQG: at least 300 bn a year by 2035; call for 1.3 trillion Carbon markets Article 6.2 6.4: Paris Agreement Crediting Mechanism 6.8: non market Adaptation goal Article 7
पाँच तंत्र एक तापमान लक्ष्य को राष्ट्रीय कार्रवाई में बदलते हैं; स्टॉकटेक ही क्रमिक कसाव है।Source: Paris Agreement; COP decisions 2021 to 2024; India's NDCs of 2022 and 2026
  • नीचे से ऊपर: NDC स्वयं तय किए जाते हैं और हर पाँच वर्ष में वैश्विक स्टॉकटेक द्वारा मिलकर समीक्षित होते हैं, इसलिए क्रमिक कसाव (ratchet) राजनीतिक है, वैधानिक नहीं। पहला स्टॉकटेक 2023 में दुबई में संपन्न हुआ और उसने पक्षकारों से ऊर्जा प्रणालियों में जीवाश्म ईंधन से हटने में योगदान देने का आह्वान किया, जो आह्वान था, बाध्यकारी चरणबद्ध समाप्ति नहीं; दूसरा 2028 में संपन्न होगा।
  • भारत के 2022 के NDC ने दो संख्याएँ संशोधित कीं: 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत नीचे (पहले 33 से 35 प्रतिशत), और 2030 तक संचयी स्थापित विद्युत क्षमता का लगभग 50 प्रतिशत गैर जीवाश्म स्रोतों से, उत्पादन का नहीं। 2030 तक 2.5 से 3 अरब टन CO2 समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक 2015 के NDC से आगे ले जाया गया। 2070 तक नेट ज़ीरो, जिसकी घोषणा 2021 में ग्लासगो में हुई, दीर्घकालिक लक्ष्य है, NDC का लक्ष्य नहीं।
  • भारत का 2031 से 2035 के लिए NDC, जो 24 अप्रैल 2026 को UNFCCC (जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क अभिसमय) को भेजा गया: 2035 तक तीव्रता 2005 से 47 प्रतिशत नीचे, 2035 तक स्थापित क्षमता का लगभग 60 प्रतिशत गैर जीवाश्म, और 3.5 से 4.0 अरब टन का सिंक, जो अंतरराष्ट्रीय वित्त, प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण पर सशर्त है।
  • अनुच्छेद 6.2 के लिए “तदनुरूपी समायोजन” आवश्यक हैं ताकि विदेश में बेची गई कटौती की गिनती घर पर भी न हो। MoEFCC (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) की 17 फरवरी 2023 की सकारात्मक सूची 13 गतिविधियाँ गिनाती है जिनका 6.2 के अंतर्गत व्यापार हो सकता है; उससे बाहर की हर चीज़ भारत के अपने NDC के साथ रहती है।
  • असली मतभेद वित्त पर है: विकसित देशों पर अभिसमय का दायित्व बनाम NCQG (नया सामूहिक परिमाणित लक्ष्य) की “स्रोतों की विस्तृत विविधता” वाली भाषा। भारत ने 24 नवंबर 2024 को बाकू के समापन पूर्ण अधिवेशन में आपत्ति जताई, राशि को तुच्छ और पाठ को दृष्टिभ्रम बताया, और विरोध किया कि उसे अंगीकरण से पहले बोलने नहीं दिया गया।

वित्त और बाज़ार विस्तार से

प्रतिवर्ष 100 अरब डॉलर का वचन 2020 में देय था और पहली बार 2022 में पूरा हुआ, जब OECD (आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन) ने यह आँकड़ा 115.9 अरब बताया। नया सामूहिक परिमाणित लक्ष्य (NCQG) विकासशील देशों के लिए 2035 तक कम से कम 300 अरब डॉलर प्रतिवर्ष तय करता है, जिसमें विकसित देश अगुवाई करेंगे पर धन सार्वजनिक और निजी दोनों स्रोतों से आएगा, साथ ही सभी कर्ताओं से 2035 तक वित्त को कम से कम 1.3 ट्रिलियन प्रतिवर्ष तक बढ़ाने का आह्वान है; 1.3 ट्रिलियन आह्वान है, लक्ष्य नहीं, और उसमें 300 अरब शामिल है, वह उसके ऊपर नहीं है। अनुच्छेद 6.4 के अंतर्गत पेरिस समझौता क्रेडिटिंग तंत्र, जिसके नियम COP26 में अंगीकृत और COP29 में पूर्ण हुए, पात्र स्वच्छ विकास तंत्र गतिविधियों को अपने अधीन लेता है; अनुच्छेद 6.8 गैर बाज़ार सहयोग को समेटता है। हानि और क्षति कोष का अंतरिम न्यासी और मेज़बान विश्व बैंक है।

मुख्य परीक्षा: पेरिस ने क्योटो के ऊपर से नीचे वाले लक्ष्यों की जगह स्वयं तय किए गए वचन और पाँच वर्षीय स्टॉकटेक रख दिए, इसलिए उसकी शक्ति भागीदारी है और दुर्बलता प्रवर्तन; भारत का मत है कि विकसित देशों का वित्त दायित्व ही प्रवर्तनीय आधा हिस्सा है।

UPSC पूछ चुका है

  • Mains 2025: पेरिस समझौते, COP26 और अपने NDC के 2022 के अद्यतन के अंतर्गत भारत की प्रतिबद्धताएँ

अतिरिक्त पठन: The Paris Agreement (UNFCCC)

यह भी देखें: भारत का राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान · हानि और क्षति · वार्ता समूह के रूप में BRICS · कार्बन सीमा समायोजन तंत्र

यह पृष्ठ अंग्रेज़ी पृष्ठ का मशीनी अनुवाद है। संदेह होने पर अंग्रेज़ी पाठ ही प्रामाणिक है। अनुवाद की त्रुटि बताएँ